मैंने कुछ दिन पहले वयं रक्षाम: पढ़ा | आचार्य चतुरसेन द्वारा लिखित यह कालजयी उपन्यास, ना सिर्फ पौराणिक इतिहास को अलग नजरिया दे रहा है अपितु भौगोलिक प्रमाणिकता को भी बखूबी कायम रखा है | अगर आप इतिहास और पौराणिक घटनाओं को जानना और समझना चाहते हैं तो आचार्य चतुरसेन द्वारा लिखी पुस्तकें अवश्य पढ़ें |
वर्ष 1989 में राजकमल प्रकाशन से पहली बार प्रकाशित इस पुस्तक ने बाजार में आते ही साहित्यप्रेमियों में धूम मचा दी थी | अब तक इसे विभिन्न प्रकाशनों ने बहुत बार रिप्रिंट कराया है | किताब महल, हिन्द पौकेट बुक्स जैसे प्रकाशकों ने इस पुस्तक को सस्ते मूल्य पर पाठकों तक पहुँचाया है |
हिन्द पौकेट बुक्स से प्रकाशित इस पुस्तक अक विवरण इस प्रकार है -
| Title: | Vayam Raksham: (Dlx) (Hindi) |
| Author: | Aacharya Chatursen |
| Edition: | Paperback |
| Language: | Hindi |
| ISBN: | 8121608775 |
| EAN: | 9788121608770 |

यह पुस्तक ऑनलाइन भी खरीदी जा सकती है | इन्फीबिम पर यह पुस्तक उपलब्ध है |
कथानक - इस उपन्यास की पृष्ठ भूमि रामायण कालखंड (त्रेता युग ) है | आर्य और अनार्यों के बीच की वैमनस्यता , सामाजिक विभिन्नता और संघर्ष की पृष्ठ भूमि में राक्षसराज रावण का उत्थान और पतन की गाथा यही इस उपन्यास का भाव है |
आर्य जातियों ने जब सूर्यमंडल और चंद्रमंडल में विभाजित दो राज समूहों वाले आर्यावर्त की रचना की | यह क्षेत्र भारत का उत्तरोतर प्रदेश थे | आर्यों के दंड नियमानुसार दण्डित जन सामाजिक बहिस्कृत होते थे | ऐसे बहिष्कृत जनों का दक्षिणारण्य (नर्मदा नदी का दक्षिण भाग, नासिक) में संगठन बने | यहाँ पर भी उनकी जातिगत व्यवस्था की गयी |कपि, नाग, पल्लव, मल्ल इतियादी जातियां यहाँ संगठित हुयीं | लेकिन इनमे भी सांस्कृतिक भिन्नता के कारण वैमनस्यता बढती रही | ऐसे में रावण द्वारा सभी जातियों को एकसूत्र में बाँधने ,उनमे वैवाहिक सम्बन्ध बढाने की दिशा में रक्ष संस्कृति का निर्माण एक नए युग की शुरुआत होता है |
रावण के महत्वाकांक्षी, साहसी और अतिशय प्रवृति को कथाकार ने बखूबी उकेरा है | पुस्तक का पूर्वार्ध जहाँ रावण के साहसिक पक्ष और उसके उपलब्धियों को रखता है वहीँ उतरार्ध रावण के पतन को चित्रित करता है | पुस्तक में रावण नायक भी है और खलनायक भी | स्त्रीमोह में भी बंधता है और पुत्रशोक भी सहता है | एक अदम्य साहस का धनी व्यक्तित्व का परिचय इस उपन्यास के द्वारा लेखक ने कराया है |
इस व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं और उनसे जुडी घटनाओं से परिचित होने के लिए यह उपन्यास पढना आवश्यक है | कथाएं तो कथ्य ही होती हैं, इनमे प्रमाणिकता का आधार कथाकार की सहमती से होता है | फिर भी अगर आप पौराणिक कथाओं में तथ्य की खोज में हैं तो इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें |

